
मैं वारी जावां
मेरा सज्जन घर आयाबांहीं उहदे रंगला चूड़ा
जिऊं संध्या दी लाली
पैरीं उहदे पाई झांजर
उहदी टोर हिरणीयां वाली
मैं वारी जावां
मेरा सज्जन घर आया
अक्खीं उहदे कज्जले दी धारी
जिवें रात कोई शगनां वाली
मत्थे उहदे टिक्का चमके
जिवें चन्न दी चानणी मतवाली
सदके जावां उस अमड़ी दे
जिस इस नूं है जाया
मैं वारी जावां
मेरा सज्जन घर आया
10 comments:
बौत वदिया लिख्या है जी।मन खुश हो गया।
बहुत बढ़िया...आज पूरा पेज पढ़ डाला आपका
anurag G aur paramjeet bali G aap dono ka bahut-2 shukriya. aap jaise bhaiyo ka hi protsahan mil raha hai to likhne ki koshish kar raha hu. bahut-2 shukriya
bhai bahut badhiya rochak dilachasp . dhanyawad
बहुत बढ़िया......
bhut khub. likhte rhe.
विजय जी आपकी नई शायरी पढ़ने के लालच से आया था ! दुबारा पुरानी पढ़ कर भी मजा आया ! आपकी हीर का तो जवाब ही नही ! पुन: धन्यवाद और शुभकामनाए !
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